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| आंदोलन करते ग्रामीण |
इससे उत्पादन और डिस्पैच पर सीधा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मौके पर तैनात सीआईएसएफ और झारखंड पुलिस बल के जवानों ने आंदोलनकारियों को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और रास्ता खोलने से इनकार कर दिया। स्थिति को संभालने के लिए सेल प्रबंधन की ओर से एचआर महाप्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह, डीजीएम सीएसआर अनिल कुमार और अमित तिर्की मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों के साथ वार्ता की।
प्रबंधन ने हर माह मुंडा-मानकी संघ के साथ बैठक कर प्रत्येक गांव से 2-3 लोगों को रोजगार देने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, आंदोलनकारी इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुए। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक 500 बेरोजगारों को रोजगार देने का लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वार्ता विफल होने के बाद आंदोलन जारी है, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है और खदान का कामकाज पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

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