ब्यूरो रिपोर्ट :-
बरहरवा : साइबर अपराधियों ने बरहरवा थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति को कथित तौर पर सीबीआई के गंभीर मामले में फंसाने और गिरफ्तार कर जेल भेजने का भय दिखाकर करीब 1.20 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। अपराधियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल के माध्यम से करीब दो माह तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान उसे लगातार निगरानी में रखने का दावा करते हुए मानसिक दबाव बनाया गया और केस से बचाने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में करीब 10 बार आरटीजीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर कराई गई।
पीड़ित गौतम चंद्र दास ने पुलिस को बताया कि उसने यह रकम अपनी बेटी की शादी के लिए काफी मुश्किल से जमा की थी। ठगी का अहसास होने के बाद उसने पहले एक रिश्तेदार को घटना की जानकारी दी और फिर पुलिस से संपर्क किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए साहिबगंज एसपी अमित कुमार सिंह ने जांच के लिए मुख्यालय डीएसपी सह साइबर सेल के नोडल पदाधिकारी रविकांत साव के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की है।
सीबीआई अधिकारी बनकर आया फोन
पीड़ित के अनुसार, जून माह में उसके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने अपना नाम प्रदीप सिंह बताते हुए खुद को सीबीआई का बड़ा अधिकारी बताया। उसने गौतम चंद्र दास से कहा कि उसके खिलाफ सीबीआई में एक गंभीर मामला दर्ज है और जल्द ही उसके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई हो सकती है।
इसके बाद कथित साइबर अपराधियों ने गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने का भय दिखाकर पीड़ित को मानसिक रूप से दबाव में लेना शुरू कर दिया। केस में राहत दिलाने और कानूनी कार्रवाई से बचाने के नाम पर उससे लगातार रकम की मांग की जाती रही।
वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कोर्ट में तीन बार पेशी
ठगी का तरीका यहीं नहीं रुका। साइबर अपराधियों ने वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित को कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। करीब दो महीने तक उसे वीडियो कॉल पर रहने और उनके निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया गया।
अपराधियों ने विश्वास पैदा करने के लिए बाकायदा फर्जी कोर्ट रूम तैयार किया। वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित की कथित तौर पर तीन बार फर्जी सीबीआई कोर्ट में पेशी कराई गई। इस दौरान उसे कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और गिरफ्तारी का भय दिखाया गया। इसके बाद केस खत्म कराने अथवा कार्रवाई से बचाने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई जाती रही।
करीब 10 बार में आरटीजीएस से भेजे 1.20 करोड़
मामले की जांच के लिए बरहरवा पहुंचे मुख्यालय डीएसपी सह साइबर सेल के नोडल पदाधिकारी रविकांत साव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में करीब 10 बार आरटीजीएस के जरिए कुल 1.20 करोड़ रुपये मंगाए गए।
जांच के अनुसार, 20 जून 2026 को 50 लाख रुपये का पहला बड़ा लेनदेन हुआ था। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में रकम ट्रांसफर कराई गई। बताया गया कि 24 अगस्त को पांच लाख रुपये का अंतिम लेनदेन किया गया।
रकम खत्म होने के बाद हुआ ठगी का एहसास
लगातार पैसे ट्रांसफर करने के बाद जब पीड़ित को पूरे मामले पर संदेह हुआ तो उसने इसकी जानकारी अपने एक रिश्तेदार को दी। इसके बाद सोमवार को पुलिस से संपर्क कर पूरी घटना की जानकारी दी गई।
सूचना मिलने पर साइबर सेल के नोडल पदाधिकारी रविकांत साव बरहरवा थाना पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। पुलिस अब बैंक खातों में हुए लेनदेन, मोबाइल नंबरों और साइबर अपराधियों के संपर्क सूत्रों की जांच कर रही है।
एसपी ने गठित की एसआईटी, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए साहिबगंज एसपी अमित कुमार सिंह ने विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी का नेतृत्व मुख्यालय डीएसपी रविकांत साव कर रहे हैं।
टीम में बरहरवा इंस्पेक्टर संतोष राणा, थाना प्रभारी सुमित कुमार सिंह, सब इंस्पेक्टर अनिल कुमार, प्रदीप महतो, साइबर सेल प्रभारी पंकज वर्मा समेत अन्य पुलिस पदाधिकारियों को शामिल किया गया है।
एसआईटी साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है। पुलिस का उद्देश्य ठगी की रकम के प्रवाह का पता लगाकर अपराधियों तक पहुंचना और उनके नेटवर्क का खुलासा करना है।
साइबर ठगी के नए तरीके से पुलिस भी सतर्क
इस घटना ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के बदलते तौर-तरीकों को उजागर किया है। फर्जी अधिकारी बनकर फोन करना, गिरफ्तारी का भय दिखाना, वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट करना और फर्जी अदालत में पेशी कराना साइबर ठगी के नए हथकंडों में शामिल है। पुलिस मामले की जांच के साथ-साथ लोगों से ऐसे फोन कॉल और वीडियो कॉल से सावधान रहने की अपील कर रही है।

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